Saturday, July 13, 2013

यूँ ही !!!

बाँवरे नैनो में थी एक बाँवरी सी ख्वाहिश
बाँवरे मौसम ने रच दी बाँवरी एक साजिश
बाँवरी सी एक थी शबरी बाँवरी थी राधा
बाँवरी सी हुई ये शब् है बाँवरा चन्दा ये आधा

बांवरी कोयल ने दे दी बांवरी सी कूक
बाँवरी गोपी से हो गयी बाँवरी सी चूक
बाँवरे मन ने है बाँधा बांवरा सा धागा
बांवरी वो शब् गयी है बांवरा जग जागा


बाँवरे हाथों ने थामी बाँवरी एक बांह
बाँवरे पैरों ने पकड़ी बाँवरी वो राह
बाँवरे नैनों ने दे दिया बांवरा एक वादा
बांवरी सांझ आ गयी है बांवरा चन्दा ये आधा

5 comments:

  1. Nice one
    to be continue.. karke suspense bada diya

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  2. nice attempt :)
    will wait for next couplet !!

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  3. सुन्दर रचना

    यूँ ही आपका बाँवरापन बना रहे

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  4. the world around is but sane .. :) well expressed :)

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